किताबों का मुताअला से क्या मिल्ता है ? - Asgar Ali Azhari

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किताबों का मुताअला से क्या मिल्ता है ?



किताबों का मुताअला से क्या मिल्ता है ?


मुताअला इन्सान के लिए अख्लाक का मेअयार है।

*(डाक्टर इक्बाल)*

* ---बुरि सोहबत से तन्हाइ अच्छी है,लेकिन तन्हाइ से परिशान होजानेका अन्देशा है,इस लिए अच्छी किताबो के मुताअले कि जरुरत है।

*(इमाम गजाली)*

*---तेल के लिए पैसा न होने कि वजह से मै रात को चौकिदारो कि कन्दिलो के पास खडे होकर किताब का मुताअला कर्ता था ।

*(हकिम अबु नस्र फाराबी)*

*---वर्जिश से जिस्म मज्बुत होता है और मुताअले कि दिमाग के लिए वहि अहमियत है जो वर्जिश कि जिस्म के लिए।(यडिसन)---मुताअले से इन्सान कि तक्मिल होति है।

*(बेकन)*

*---मुताअले कि आदत इखतियार कर्लेने का मतलब येह है कि आँप ने गोया दुनिया जहाँ के दुखो से बच्ने के लिए एक मह्फुज पनाह गाह तयार करलि है।

*(समर सिट माहम)*

*--- तीन दिन बैगर मुताअले गुजार लिने के वाद चौथे रोज गुफ्तगु मे फिका पन आजाता है।(चैनी जरबुल मिस्ल)--- इन्सान कुदरती मनाजिर और किताबो के मुताअले से बहुत कुछ सिख सकता है।

*(ससरु)*

----मुताअले कि बदौलत एक तरफ तुम्हारी मालुमात मे इजाफा होगा और दुसरि तरफ तुम्हारी शखसियत दिलचस्प बन जायेगी।

*(वाइटी)*

*--- दिमाग के लिए मुताअले कि वहि अहमियत है जो कनुल क लिए पानी कि।

*(तुलसी दास)*

*--- मुताअले किसि से इखतेलाफ कर्ने या फसिह जबान मे गुफ्तगु कर्ने कि गरज से न करो बल्की"तौल्ने" और "सोचने"कि खातिर करो।

*(बैकन)*

*--- जिस तरह कइ किसिम के बिज कि काशत कर्ने से जमिन जर्खेज हो जाती है,इसि तरह मुखतलिम उनवानात पर किताबो और रिसालो वगैरह का मुताअला इन्सान के दिमाग को मुनवर बना देता है।

*(मल्टिन)*

*--- जो नौजवान इमानदारी से कुछ वकत मुताअले मे सर्फ कर्ता है,तो उसे अप्ने नतायज के बारे मे बिल्कुल मुतफक्किर न होना चाहिय।

*(वलिम जय्मज)*

*---मुताअले से खलवत मे खुशी ,तकृर मे जैबाइश,तर्तिब व तदविन मे इस्तेअदाद और तजर्बे मे उसअत पैदा होति है।

*(बैकन)*

*---वह शख्स निहायत हि खुशनसिब है जिस को मुताअले का शौक है,लेकिन जो फहश किताबो का मुता अला  कर्ता है उस से वोह शख्स अच्छा है जिस को मुताअला का शौक नहि।

*(मिकाले)*

*---मुता अले जहेन को जला देने क लिए और उस कि तरक्की के लिए जरुरी है।

*(शिले)*

*-- अक्सर देखा गया है कि अच्छी और मोजो किताबो के मुताअले ने इन्सान के मुस्तक्बिल को सवार दिया।

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✏असग़र अली अज़्हरी

🎓अल् अज़हर विश्व बिद्यालय, काएरो मिश्र  ,

🗓 19 july 2020

*(मन्कुल)*