रमजान शरीफ के रोजों के जरूरी मसाईल ( Part-1 )
मोअज्जज कारिइने किराम !
रमजान का मुबारक महिना हमारे लिए फिर एक मर्तबा रोजे का मुबारक तोहफा लिए हाजिर हो रहा है । 30 दिन का यह महिने मे अल्लाह तआला ने हम सारे मुसलमान पर रोजा फर्ज फर्माया है । हर बालिग मुसलमान मर्द और औरत पर पुरे महिने के रोजे फर्ज हैँ । जिस तरह हमारे लिए रोजे फर्ज हैँ उसि तरह उन रोजों केबारे मे अहम मसाइल का जानना , जिससे रोजे टुट जाते हैँ या रोजे कैसे रखे जाने चाहिए इन सब मसाइल का जानना भि बहुत जरूरी होता है । इन मसाइल के बिना एक आदमी सहि तरिके से रोजा नहिँ रख सकता ।
इसि लिए आज हम ने आँप सभी के लिए रोजेके बारे मेँ चन्द अहम और जरूरी मसाइल को ले कर आए हैँ । इन मसाइल को बगौर पढेँ और इस पर अमल भि करेँ ।
और अपने साथी , रिश्तेदार तक यह बातें पहुंचाने में हमारी मदद भि करेँ ।
1-दूसरी हिजरी के दस शअबान को रमजान शरीफ के रोजे फर्ज हुए इससे पहले आशूरा के रोजे फर्ज थे आप सलल्लाहु अलैहि व सल्लम ने *नौ साल* रमजान के रोजे रखे।
2-बगैर जरूरत के रमजान के रोजे छोड्ना हराम है।
रोजों का इन्कार करना या मजाक उडाना कुफ्र है ।
3-सहरी का समय टाईम टेबल से देखें अजान बाद में भी दी जा सकती है। इसीलिए सहरी ओर इफ्तारी में रोजों के टाईम टेबल का इस्तेमाल करें ।
4-कोरोना की वजह से बगैर किसी मजबूरी के रोजे नहीं छोडे जाएगें।
अगर किसी को समझदार मुस्लमान डाक्टर ने मना किया हो तो उसके लिए अलग हुक्म है ।
5-सहरी में बगैर कुछ खाए भी रोजा रख सकते हैं लेकिन बेहतर यह है कि सहरी खा कर रोजा रखें ।
6-रोजे की निय्यत रात से करना जरूरी नहीं है दोपहर से पहले तक निय्यत कर ली तो भी रोजा हो जाएगा
ओर जबान से निय्यत करना भी जरूरी नहीं है बस दिल में निय्यत कर ले काफी है जबान से बस मुस्तहब है।
7-अगर सुबह सहरी के वक्त नींद नहीं खुली बाद में उठा तो भी रोजा हो जाएगा बस शर्त यह है कि अब कुछ न खाए
8-रोजे की हालत में ग्लूकोज चङा सकते हैं इसी तरह ताकत का ईन जेक्शन भी लगा सकते हैं अगरचे इससे भूक या प्यास खत्म हो जाए।
9-इनहैलर से रोजा टूट जाएगा।
10-रोजे की हालत में खून निकलवा सकते हैं।
11-रोजे की हालत में ईन जैक्शन लगवा सकते हैं।
12- रोजे की हालत में मां अपने बच्चे को दूध पिला सकती है।
अगर मां को डर हो कि अगर वह रोजा रखेगी तो बच्चा भूक मर जाएगा या कोई ओरत हामिला (पेट से) है कमजोरी महसूस करती है तो इन दोनों को रोजा छोङने की इजाजत है।
13-जब ओरत को हैज (माहवारी) का खून आए तो जब तक खून आता रहे रोजे ओर नमाजें छोड़ दे। ईद के बाद नमाजों की कजा नहीं है बस जितने दिन खून आया उतने दिन रोजों की कजा करे।
14-रमजान के महीने में रात में बीवी से हमबिस्तरी करना जाईज है।
15-नापाक था सुबह बगैर स्नान किए सहरी कर ली तो भी रोजा हो जाएगा अगरचे पूरा दिन नापाक रहा रोजा हो जाएगा । लेकिन स्नान जल्दी कर लेना चाहिए क्योंकि नमाजें भी पढनी है।
नोट ! मजीद जानकारी के लिए *रमजान शरीफ के रोजों के जरूरी मसाईल Part- 2 जरूर पढेँ ।
✏असग़र अली अज़्हरी
🎓अल् अज़हर विश्व बिद्यालय, काएरो मिश्र ,
🗓 20 Apr 2020
