🥀🥀 कुफ्र व शिर्क का बयान 🥀🥀
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सवाल :- कुफ्र किसे कहते हैं ?
🌺🌺🏵️🌹🌺🌺🏵️🌹🌺🌺🏵️जवाब:-जरूरीयाते दीन में से किसी एक बात का इनकार करना कुफ्र है। जरूरीयाते दीन बहुत हैं इन में से कुछ ये हैं ।
# अल्लाह ﷻ पाक को एक और वाजीबुल वजूद मानना। # उसकी ज़ात व सिफात में किसी को शरीक ना समझना, # ज़ुल्म और झूठ वगैरा तमाम एबों से उसको पाक मानना, #उसके मलाइका और उसकी तमाम किताबों को मानना, #कुरान मजीद की हर एक आयत को सच समझना ,
#हुज़ूर साय्यदे (ﷺ) आलम और तमाम अंबिया ए किराम علیہ السلام की नुब्ववत को तस्लीम करना,
# इन सब को अज़मत वाला जानना ।
# इन्हें ज़लील और छोटा ना—समझना इनकी हर बात जो यकीनी तौर पर साबित हो उसे सच मानना।
# हुज़ूर (ﷺ) को खातिमुन्नबिय्यीन ( आखरी नबी ) मानना।
# इनके बाद किसी नबी के पैदा होने जो जायज़ ना—समझना,
# कयामत,हिसाब व किताब और जन्नत दोज़ख् को सच मानना,
# नमाज़ रोज़ा और हज व ज़कात की फरजिय्यत को तस्लीम करना,
# ज़िना चोरी और शराब नोशी वगैरा हराम और बहुत बुरा मानना और कुफ्र को कुफ्र जानना वगैरा।
( अनवारे शरीयत* उन्वान *शिर्क व कुफ्र का बयान* पेज:12-13 )
*सवाल:-* शिर्क किसे कहते हैं?
*जवाब:-* अल्लाह पाक ﷻ की ज़ात व सिफात में किसी को शरीक ठहराना शिर्क है।1:- अल्लाह पाक ﷻ की ज़ात में शरीक ठहराने का मतलब ये है के 2 या 2 से ज़्यादा खुदा मानना। जैसे के *ईसाई* जो के 3 खुदा मान कर मुशरिक हुए और जैसे हिन्दू के कई खुदा मानने के सबब मुशरिक हैं।
और सिफात।
2:- सिफात की तरह किसी दूसरे के लिए सिफ्त साबित करना मसलन समअ ( सुन्ने कि ताकत ) और बसर ( देखने कि ताकत ) वगैरा जैसा के खुदा ए पाक ﷻ के लिए बगैर किसी के दिए जाती तौर पर साबित है। इसी तरह किसी दूसरे के लिए समअ और बसर वगैरा ज़ाती तौर पर माने के बगैर अल्लाह पाक ﷻ के दिए उसे ये सिफतें खुद हासिल हैं तो शिरक है और अगर किसी दूसरे के लिए अताई ( अनुदान ) तौर पर माने के अल्लाह ﷻ पाक ने उसे ये सिफतें दी हैं तो शिर्क नहीं जैसा के अल्लाह पाक ने खुद इंसान के बारे में फरमाया :
فَجَعَلْنٰهُ سَمِیْعًۢا بَصِیْرًا(۲)
( पारह 29 सुरह इन्सान )
तर्जमा : हमने इंसान को समिअ ( सुन्ने वाला ) और बसीर ( देखने वाला) बनाया।
( अनवारे शरीयत* उन्वान *शिर्क व कुफ्र का बयान* पेज:12 )
