हैज़ व निफास के बारे मे अहम् मालूमात - Asgar Ali Azhari

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Asgar Ali Azhari

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हैज़ व निफास के बारे मे अहम् मालूमात

 सवाल - जवाब [ हैज़ &निफ़ास ]


हैज़ व निफास के बारे मे अहम् मालूमात 


*_सवाल------ मैं आपके ग्रुप में हूँ एक सवाल पूछना चाहती हूँ कि मैं दोपहर में बच्चों को दीनी तालीम देती हूँ पर हैज़ के दिनों में हमको छुट्टी करनी पड़ जाती है तो कोई तरीक़ा है कि मैं हैज़ के दिनों में भी बच्चों को पढ़ा सकूँ_*

*_जवाब---- हैज़ के दिनों में आप क़ुरआन शरीफ तो पढ़ा नहीं सकते हां एक तरीक़ा है कि हैज़ या निफास की ह़ालत में एक एक कलिमा सांस तोड़ तोड़ कर पढ़ायें और हिज्जे कराने में कोई हरज नहीं है,,_*
*📕बहारे शरीयत जिल्द 1 हिस्सा 2 सफह 117*
*📕औरतों के मसाइल हिस्सा 2 सफह 16*

*_सवाल---- घर के काम काज के साथ साथ मैं कोशिश करती हूँ कि हर वक़्त दुरुद पाक पढ़ती रहूँ, पर हैज़ के दिनों में सोचती हूँ कि ये जायज़ होगा या नहीं आप कुछ रहनुमाई फरमां दें_*

*_जवाब----- नापाकी की ह़ालत में आप बिलकुल दुरुद पाक कलिमा शरीफ- वगैरह पढ़ सकती हैं कोई हरज नहीं बहारे शरीयत में है कि ह़ालते हैज़ व निफास में क़ुरआन शरीफ के अलावा तमाम अज़कार कलिमा शरीफ- दुरुद शरीफ- वगैरह पढ़ना जायज़ बल्कि मुस्तहब है और इन चीज़ों को वुज़ू या कुल्ली कर के पढ़ना बेहतर है वैसे ही पढ़ लिया जब भी हरज नहीं_*
*📕बहारे शरीयत जिल्द 1 हिस्सा 2 सफह 117


*_सवाल---- हैज़ की ह़ालत में क्या किसी कपड़े के ज़रिए क़ुरआन शरीफ को हाथ लगाया जा सकता है?_*


*_जवाब------ ज़रुरत पड़ने पर अगर क़ुरआन शरीफ जुज़दान में हो तो उसे हाथ लगाने में कोई हरज नहीं मगर अपनी कमीज के दामन या डुबट्टा वगैरह से छूना जायज़ नहीं,_*
*📕बहारे शरीयत जिल्द 1 हिस्सा 2 सफह 117*

*_सवाल---- मगरिब का बिलकुल आखिरी वक्त था और अभी नमाज़ अदा नहीं की थी कि हैज़ आगया तो क्या मगरिब की नमाज़ माफ हो गई या पाक होने के बाद क़ज़ा करनी पड़ेगी?_*


*_जवाब------ अगर नमाज़ का आखिरी वक्त हो गया और अभी तक नमाज़ नहीं पढ़ी थी कि हैज़ आगया या बच्चा पैदा हो गया तो वह नमाज़ माफ हो जाती है_*
*📕बहारे शरीयत जिल्द 1 हिस्सा 2 सफह 117*

*_सवाल---- एक सवाल है कि जैसे किसी को इस मरतबा दो दिन हैज़ का खून आया और फिर दरमियान में 15 दिन कुछ नहीं आया तो क्या ये तमाम दिन हैज़ ही में शुमार किये जायेंगे,_*


*_जवाब----- हैज़ की कम से कम मुद्दत तीन दिन और तीन राते है और दो हैज़ो के दरमियान कम से कम पन्द्रह दिन का फासला होना ज़रूरी है लिहाज़ा आपको जो दो दिन खून आया वह इस्तिहाज़ा यानि कि बीमारी का खून है हैज़ की नहीं थी,और जो पन्द्रह दिन दरमियान में पाकी के गुज़रे वह भी पाक दिनों में ही शुमार होंगे,_*
*📕बहारे शरीयत जिल्द 1 हिस्सा 2 सफह 112*


*_सवाल------ एक सवाल ये है कि कई सालों से मेरा ये मामूल रहा है कि मुझे 6 दिन हैज़ m.c,आता है मगर दरमियान में एक दिन या कभी आधे दिन का वक़फा भी आजाता है कि जिस में खून बिलकुल नहीं आता तो क्या उस वक्त को भी हैज़ में ही शुमार करेंगे?_*

*_जवाब----- जी हाँ ये ज़रुरी नहीं कि मुद्दत में हर वक़्त खून जारी रहे जभी हैज़ हो- बल्कि अगर बाज़ वक्त आये और बाज़ वक्त रुक जाये जब भी हैज़ है_*
*📕बहारे शरीयत जिल्द 1 हिस्सा 2 सफह 113*

*_सवाल---- मेरी बेटी जिस की उम्र 8 साल है उसको दो दिन खून आया तो ये खून हैज़ m.cका होगा या किसी बीमारी के सबब होगा,?_*


*_जवाब---- हैज़ का खून कम से कम 9 बरस के बाद शुरू होता है- लिहाज़ा आपकी बेटी को जो खून आया है वह इस्तिहाज़ा यानि बीमारी का खून है- हैज़ का नहीं_*
*📕बहारे शरीयत जिल्द 1 हिस्सा 2 सफह 113*

*_सवाल----- मैं ह़मल से हूँ और मुझे चार दिन खून आगया तो क्या ये हैज़ का खून है_*


*_जवाब------ ह़ामिला को जो खून आता है वह हैज़ का नहीं बल्कि इस्तिहाज़ा का होता है- इसलिए जो आपको खून आया वह बीमारी का खून है हैज़ का नहीं,_*
*📕बहारे शरीयत जिल्द 1 हिस्सा 2 सफह 113*

*_सवाल----- मेरी भांजी पैदा हुई तो मेरी बहन को सिर्फ बीस दिन खून आया तो क्या वह चालिस दिन पूरे करे या गुस्ल कर के पाकी हासिल कर ले?_*


*_जवाब------ अक्सर औरतों में यह रिवाज है कि बच्चा पैदा होने के बाद जब तक चिल्ला पूरा न हो चाहे खून आना बंद हो गया हो न नमाज़ पढ़ें न रोज़ा रखें और न अपने को नमाज़ के लायक़ जाने यह महज़ जहालत है- जब निफास यानि खून आना बंद हो जाए उसी वक्त से नहा कर नमाज़ शुरू कर दें और अगर नहाना नुकसान करे तो तयम्मुम कर के नमाज़ पढ़े- यानि निफास की मुद्दत चालीस दिन ज़रुरी ख्याल करना गलत फहमी है,जबतक खून आए तभी तक औरत निफास में मानी जायेगी,ख्वाह चन्द दिन ही हुए हों,हाँ अगर चालीस दिन गुज़रने के बाद भी खून आना बंद न हो तो चालीस दिन के बाद नहा कर नमाज़ पढ़ेगी,और जिन दिनों में उस पर नमाज़ रोज़ा फर्ज़ है उन दोनों में शौहर और बीवी का हमबिस्तर होना भी जायज़ है, लिहाज़ा आपकी बहन गुस्ल कर के नमाज़ शुरू कर दे_*
*📕गलत फहमियां और उनकी इस्लाह सफह,22/23*
*📕बहारे शरीयत हिस्सा 2 सफह 116-📕ब- ह़वाला औरतों के मसाइल हिस्सा 2 सफह 18*

*_सवाल---- मेरी माँ का कहना है कि अगर सूरज निकलने के बाद हैज़ आया तो उस दिन का रोज़ा हो जाता है और उसकी कज़ा की भी ज़रुरत नहीं क्या ये दुरुस्त है?_*


*_जजवाब----- अगर रोज़े की ह़ालत में हैज़ या निफास शुरू हो गया तो रोज़ा टूट जाता है अगर चेह मगरिब से थोड़ी ही देर पहले क्यों न हो रोज़ा टूट जायेगा लिहाज़ा उस रोज़े की क़ज़ा रखनी चाहिए फर्ज़ रोज़ा हो तो क़ज़ा फर्ज़ है और नफ्ल रोज़ा हो तो क़ज़ा वाजिब है,_*
*📕सुन्नी बहेश्ती ज़ेवर ब- ह़वाला औरतों के मसाइल हिस्सा 2 सफह 19*

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✏असग़र अली अज़्हरी

🎓अल् अज़हर विश्व बिद्यालय, काएरो मिश्र  ,

🗓 7 mar 2020